मोहब्बत, बग़ावत और तन्हाई का फ़लसफ़ा : जौन एलिया एक अजब-ग़ज़ब शायर | किताबें & सिनेमा

 

कुछ शायर ऐसे होते हैं जिन्हें पढ़ना महज़ पढ़ना नहीं होता, बल्कि उनकी बेचैनी, तन्हाई और सवालों से होकर गुजरना होता है। जौन एलिया उन्हीं शायरों में से एक हैं जो खुद को पागल कहते थे और जिन्हें सुनने और पढ़ने के लिए दुनिया को पागल होना ही पड़ेगा। उनकी शायरी में एक अजीब-सी दीवानगी दौड़ी चली आती है और पाठक उस दीवानगी के दरिया में गोते लगाने लगता है।

मुंतज़िर फ़िरोज़ाबादी की इस किताब में जौन साहब के जटिल और दिलचस्प व्यक्तित्व को करीब से समझने का अवसर देती है। यह महज़ एक जीवनी नहीं, बल्कि उस इंसान और शायर की तलाश है जिसके भीतर मोहब्बत, बग़ावत, फ़लसफ़ा, तन्हाई और बेचैनी एक साथ मौजूद थे। यह किताब उस शायर के जीवन दर्शन को खोलकर रखती है जिसने खुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं। जौन एलिया को अक्सर सिर्फ़ दर्द और मोहब्बत के शायर के रूप में याद किया जाता है, लेकिन किताब उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को भी सामने लाती है जो उनकी शायरी को समझने के लिए बेहद ज़रूरी हैं। उनकी बाग़ी सोच, समाज को देखने का अलग नज़रिया और रिश्तों को लेकर उनकी जटिल संवेदनाएँ उन्हें उम्दा शायर होने का प्रमाण देती है।

इस किताब की खूबसूरती यह है कि जौन को किसी आदर्श या महान व्यक्तित्व के साँचे में ढालने की कोशिश नहीं की गई है। उनके भीतर मौजूद कमज़ोरियों, कड़वाहट, बेचैनी और अकेलेपन को भी उसी सहजता से सामने रखा गया है। यही ईमानदारी जौन को पाठक के और करीब ले आती है। उन्हें पढ़ते हुए लगता है कि उनकी तल्ख़ी के पीछे एक बेहद संवेदनशील और तन्हा इंसान मौजूद था। जौन का दर्द सिर्फ़ अधूरी मोहब्बत का दर्द नहीं था। उसमें ज़िंदगी से असंतोष, समाज से टकराव, रिश्तों की उलझन और अपने समय से पैदा हुई निराशा भी शामिल थी। 


मुंतज़िर फ़िरोज़ाबादी ने जौन एलिया की जिंदगी और उनकी ग़ज़लों को जिस तरह साथ रखकर प्रस्तुत किया है, उससे पाठक शायर के शब्दों के पीछे छिपे इंसान को देखने लगता है। भाषा सहज है और प्रस्तुति ऐसी कि किताब पढ़ते हुए कई जगह ऐसा अहसास होता है जैसे किसी पुरानी शाम में बैठकर जौन साहब की जिंदगी, मोहब्बत और दर्द की दास्तान सुन रहे हों। जौन ने किताबों को खरीदना और उन्हें पढ़ने को लेकर बहुत अच्छा कहा है जो इस किताब में दर्ज है। अगर आप जौन एलिया की शायरी के मुरीद हैं, उर्दू से मोहब्बत करते हैं, जिनकी शायरियां आपने इंस्टग्राम पर कई दफा स्क्रोल की हैं, जिनकी रचनाएँ उनके जीवन की बेचैनियों से जन्म लेती हैं, तो यह किताब आपके लिए एक खूबसूरत सफ़र हो सकती है। और आखिर में उन्हीं की शायरी के साथ कि 'जो गुज़ारी ना जा सकी हमसे, हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है...



No comments:

कलम क्या-क्या लिखाए

मोहब्बत, बग़ावत और तन्हाई का फ़लसफ़ा : जौन एलिया एक अजब-ग़ज़ब शायर | किताबें & सिनेमा

  कुछ शायर ऐसे होते हैं जिन्हें पढ़ना महज़ पढ़ना नहीं होता, बल्कि उनकी बेचैनी, तन्हाई और सवालों से होकर गुजरना होता है। जौन एलिया उन्हीं शाय...