रिश्तों की अनकही परतों को टटोलती कहानियाँ : अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार | किताबें & सिनेमा

 

विजयश्री तनवीर का कहानी-संग्रह ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ रिश्तों के उन हिस्सों को गहराई से सामने लाता है, जिन्हें अक्सर शब्द नहीं मिल पाते। इन कहानियों में प्रेम है लेकिन केवल प्रेमी-प्रेमिका वाले अर्थ में नहीं, यहाँ प्रेम के साथ अकेलापन, प्रतीक्षा, स्मृतियाँ, असुरक्षाएँ, दूरी और अधूरे रिश्तों की कसक भी है। विजयश्री रिश्तों को किसी निश्चित परिभाषा में बाँधने के बजाय उनकी जटिलता और मानवीय कमजोरियों के साथ प्रस्तुत करती हैं। 

संग्रह की शीर्षक कहानी ‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ विशेष रूप से ध्यान खींचती है। अनुपमा का चरित्र कई भावनात्मक परतों से गुजरता है। उसके अनुभव केवल उसके व्यक्तिगत जीवन की कहानी नहीं रह जाते, बल्कि पाठक को यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि मनुष्य की इच्छाओं और भावनाओं को सामाजिक मानकों के आधार पर कितना आसानी से समझा जा सकता है। ‘समंदर से लौटती नदी’ कहानी में संवेदनाओं का विकास बेहद सहज ढंग से होता है। वहीं ‘एक उदास शाम के अंत में’ और ‘खजुराहो’ जैसी कहानियाँ पात्रों के बाहरी जीवन से अधिक उनके भीतर चल रहे युध्द को सामने रखती हैं। 

विजयश्री तनवीर की भाषा इस संग्रह की महत्वपूर्ण विशेषता है। उनकी शैली में काव्यात्मक स्पर्श है, लेकिन बनावटी कतई नहीं लगती। वे घटनाओं का केवल वर्णन नहीं करतीं, बल्कि उनके पीछे छिपे भाव को भी पाठक तक पहुँचाती हैं। कई प्रसंग इसलिए प्रभावी बन जाते हैं क्योंकि वे हमारे आसपास के जीवन जैसे लगते हैं। इन कहानियों के किरदार अपने हिस्से का पूर्ण समर्पण कहानी को सौंप देते हैं। वे कोई नायक की तरह नहीं बल्कि गलतियों, कमजोरियों और उलझनों के साथ सामने आते हैं। यही अपूर्णता उन्हें विश्वसनीय बनाती है। 

‘अनुपमा गांगुली का चौथा प्यार’ उन पाठकों को अधिक आकर्षित कर सकता है जो कहानी के भीतर मौजूद मनोभावों को पढ़ना पसंद करते हैं। यह किताब शोर नहीं करती; धीरे-धीरे अपनी जगह बनाती है। किताब की एक-एक कहानी आप पढ़ने के बाद थोड़ा ठहर जाते हैं। यह कहानी संग्रह प्रेम और रिश्तों को एक ही नजरिए से देखने के बजाय उनके कई रंगों और अनकही परतों को सामने रखता है, जो किताब को अन्य किताबों से अलग और यूनिक बनाता है।



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