प्रेम, दोस्ती और मानवीय संवेदनाओं को समेटे पाँच अफ़साने : बनारसी अफ़साने | किताबें & सिनेमा

 

प्रियंवदा दीक्षित की बनारसी अफ़साने किताब अपने पाँच अफ़सानों को गाइड बना पाठकों को बनारस की गलियों, घाटों, चाय की दुकानों, और वहाँ के लोगों की भावनाओं से जोड़ देती है। यह केवल कहानी-संग्रह नहीं, बल्कि बनारस के घाटों के वो अनगिनत किस्से हैं जो बनारस के यथार्थ को बताते हैं। प्रियंवदा की भाषा इतनी सहज, आत्मीय और प्रभावशाली है कि हर दृश्य आँखों के सामने जीवंत हो उठता है। फिर हर कहानी के अंत में दिया बेजोड़ ज्ञान उस कहानी के सार को बड़ी सुंदरता से कह देता है।

संग्रह की पहली कहानी "अस्सी घाट" दोस्ती, प्रेम और बिछड़ने के दर्द को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है। किसी अपने के चले जाने के बाद जीवन बदल तो जाता है, लेकिन सच्चे दोस्त हमें फिर से जीना सिखाते हैं। दूसरी कहानी "नई सड़क" सांप्रदायिक दंगों की भयावहता और राजनीति के कारण सबसे अधिक पीड़ित होने वाले आम और मासूम लोगों की व्यथा को सामने लाती है। "मणिकर्णिका" कहानी थर्ड जेंडर समुदाय के संघर्ष, सामाजिक उपेक्षा और उनके भीतर छिपे दर्द को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। चौथी कहानी "वी.टी. रोड" अधूरे प्रेम की कसक और जीवन में आगे बढ़ने की आवश्यकता को बड़ी खूबसूरती से व्यक्त करती है। फिर आखिरी कहानी "तुलसी घाट" सच्चे प्रेम और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने के साहस की कहानी है। यह संदेश देती है कि प्रेम तभी पूर्ण होता है जब उसमें विश्वास और साथ निभाने का साहस हो। किताब में बनारस के अफ़साने वहाँ की आध्यात्मिक छाप लिए हुए हैं। वहाँ की आत्मीय संस्कृति हर कहानी में साँस लेती हुई महसूस होती है। 

बहरहाल, प्रियंवदा की भाषा सरल, सहज और बिना किसी बनावटीपन के होने से सीधे दिल तक पहुँचती है। हर कहानी अपने भीतर एक अलग संसार समेटे हुए है। कहीं दोस्ती है, कहीं अधूरा प्रेम, कहीं सामाजिक संवेदनाएँ और कहीं जीवन को नए नज़रिए से देखने की प्रेरणा। यदि आप ऐसी कहानियाँ पढ़ना चाहते हैं जो आपके दिल को छू जाएँ और बनारस को एक नए नजरिया से देखने के लिए मजबूर कर दे तो बनारसी अफ़साने अवश्य पढ़िए।




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